उसने पूछा कि कौनसा तोहफा है मनपसंद?
…….
मैंने कहा वोह शाम जो अब तक उधार है…!!
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जो हम में तुम हो और तुम में हम..
तो बताओ, बीच में है काहे का वहम !
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खामोश हो पर चुप नहीं तुम…
ये आंखें तुम्हारी बहुत बोलती है
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आज फिर बैठे है इक हिचकी के इंतजार में…….
पता तो चले कब हमें याद करते है…..!!
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वजह पूछोगे उम्र गुज़र जाएगी………
कहा न अच्छे लगते हो तो बस लगते हो ..!!
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मुस्करा के जो देखा तो कलेजे में चुभ गये………
खँजर से भी तेज लगती हैं आँखे जनाब की…..!!
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न जाने क्यूं हमें इस दम तुम्हारी याद आती है……
जब आंखों में चमकते हैं सितारे शाम से पहले…!!
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ना रख इतना गरूर ..अपने नशे में ए शराब,
तुझ से जयदा नशा रखती है, आँखें किसी
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