Usne iss nazakat se mere hotho ko chuma ,
Ki Roza bhi na tuta aur iftari bhi ho gayi
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दोस्ती का रिश्ता पुराना नहीं होता;
इससे बड़ा ख़जाना नहीं होता;
दोस्ती तो प्यार से भी पवित्र है;
क्योंकि इसमें कोई पागल या दीवाना नहीं होता।
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क्यों मुश्किलों में साथ देते हैं दोस्त;
क्यों गम को बांट लेते हैं दोस्त;
न रिश्ता खून से न रिवाज से बंधा;
फिर भी जिंदगी भर साथ देते हैं दोस्त।
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रुक गया है आसमान में चाँद चलते चलते……
अब तुम्हें, छत से उतरना चाहिए….
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खुद को लिखते हुए हर बार लिखा है ‘तुमको’ …
इससे ज्यादा कोई जिंदगी को क्या लिखता…!!
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