पथ्थर समझ के हमें मत ठुकराओ ,
कल हम मंदिर में भी हो सकते हैं ।
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“युं तो गलत नही होते अंदाज चहेरों के…
लेकिन लोग…
वैसे भी नहीं होते जैसे नजर आते है..!!”
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दिल में है जो बात किसी भी तरह कह डालिए
ज़िन्दगी ही ना बीत जाए कहीं बताने मे ….
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जिस्म का दिल से अगर वास्ता नहीं होता !
क़सम खुदा की कोई हादसा नहीं होता !
वे लोग जायें कहाँ बोलिये खड़े हैं जो ,
उस हद के बाद जहाँ रास्ता नहीं होता !
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जुबां पे झूंट जब आया उसे मैंने दबा दिया,
कहा फिर भी नहीं की तू मुझे छोड़ चुकी हे तु
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रोज़ रोते हुए कहती है ये ज़िंदगी मुझसे
सिर्फ एक शख्स कि खातिर मुझे बर्बाद मत कर ….
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ए दिल अब तो होश मैं आ…..
यहाँ तुझे कोई अपना कहता ही नहीं….
और तू है की खामख्वा किसी का बनने पे तुला है…..
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किसी को मिल गया मौका, बुलन्दियों को छूने का,
मेरा नाकाम होना भी किसी के काम तो आया।
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तु हजार बार भी रूठे तो मना लुगाँ तझे,
मगर देख, मुहब्बत में शामिल कोई दुसरा न हो।।
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मौम के पास कभी आग को लाकर देखूँ,
सोचता हूँ के तुझे हाथ लगा कर देखूँ……
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दिल का मंदिर बड़ा वीरान नज़र आता है,
सोचता हूँ तेरी तस्वीर लगा कर देखूँ….
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चाँद उतरा था हमारे आँगन में,
ये सितारों को गवाँरा ना हुआ,
हम भी सितारों से क्या गिला करें,
जब चाँद ही हमारा ना हुआ…!!!
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भीगी आँखों से मुस्कराने में मज़ा और है,
हसते हँसते पलके भीगने में मज़ा और है,
बात कहके तो कोई भी समझलेता है,
पर खामोशी कोई समझे तो मज़ा और है..
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भूल जाना उसे मुश्किल तो नहीं है लेकिन
काम आसान भी हमसे कहाँ होते हैं!
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गुज़र गया वो वक़्त जब तेरी हसरत
थी मुझको,
अब तू खुदा भी बन जाए तो भी तेरा सजदा ना करूँ…
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जिंदगी देने वाले , मरता छोड़ गये,
अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये,
जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की,
वो जो साथ चलने वाले, रास्ता मोड़ गये”
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हालात की दलील देकर उन्होनें साथ छोङ़ा , तो हम आहत नहीं हुए ….,
सोचा हमसे ना सही , चलो किसी से तो वफ़ा निभाई उन्होने…
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“ज़िन्दगी ने आज कह दिया है मुझे,
किसी और से प्यार है,
मेरी मौत से पूछो,
अब उसे किस बात का इंतज़ार है.”
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घर से तो निकले थे हम ख़ुशी की ही तलाश में,
किस्मत ने ताउम्र का हमैं मुसाफिर बना दिया।
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उन्हें नफरत हुयी सारे जहाँ से ,
अब नयी दुनिया लाये कहाँ से…!
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तू मेरे जनाज़े को कन्धा मत देना,
कही ज़िन्दा ना हो जाऊँ फिर तेरा सहारा देख कर …
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दीं सदायें जिंदगी ने मैं ही सुन पाया नहीं,
ख्वाब आँखों में बहुत थे कोई बुन पाया नहीं।
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दिल भी एक जिद पर अड़ा है किसी बच्चे की तरह,
या तो सब कुछ ही चाहिए या कुछ भी नही…..
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वो अपने मेहंदी वाले हाथ मुझे दिखा कर रोई,
अब मैं हुँ किसी और की, ये मुझे बता कर रोई,
पहले कहती थी कि नहीं जी सकती तेरे बिन,
आज फिर से वो बात दोहरा कर रोई…
कैसे कर लुँ उसकी महोब्बत पे शक यारो…!!
वो भरी महफिल में मुझे गले लगा कर रोई…
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“दोस्त ने दोस्त को, दोस्त के लिए रुला दिया,
क्या हुआ जो किसी केलिए उसने हूमें भुला दिया,
हम तो वैसे भी अकेले थे अच्छा हुआ
जो उसने हमे एहसास तो दिला दिया.“
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अगर है दम तो चल डुबा दे मुजको,
समंदर नाकाम रहा, अब तेरी आँखो की बारी..
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जब से पता चला है, की मरने का नाम है ‘जींदगी’;
तब से, कफ़न बांधे कातील को ढूढ़ते हैं!”
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तुम जैसा मुझे… कोण? कब???
कहा?? और कैसे??? मिलेगा ??
सोचो…
बताओ…
वरना मेरे हो जाओ ………………………!!”
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रात सारी तड़पते रहेंगे हम अब ,
आज फिर ख़त तेरे पढ़ लिए शाम को”
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जिंदगी भर के इम्तिहान के बाद …..
वो शख्स
नतीजे में किसी और का निकला ..
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मोहब्बत उसे भी बहुत है मुझसे
जिंदगी सारी इस वहम ने ले ली…
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“बादशाह तो में कहीं का भी बन सकता हूँ
पर तेरे दिल की नगरी में हुकूमत करने
का मज़ा ही कुछ अलग है………”
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नहीं चाहिए कुछ भी तेरी इश्क़ कि दूकान से,
हर चीज में मिलावट है बेवफाई कि..!!!!
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काश तुम मौत होती तो…………. ….
एक दिन मेरी जरूर होती …………… ….‼
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बुला कर तुम ने महफ़िल में हमें ग़ैरों से उठवाया
हमीं ख़ुद उठ गए होते इशारा कर दिया होता…
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तूने हसीन से हसीन चेहरो को उदास किया है….
ए इश्क ….
तू अगर इन्सान होता तो तेरा पहला कातिल मै होता ।
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ना आना लेकर उसे मेरे जनाजे में,
मेरी मोहब्बत की तौहीन होगी,
मैं चार लोगो के कंधे पर हूंगा,
और मेरी जान पैदल होगी.
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“वो जो हमसे नफरत करते हैं,
हम तो आज भी सिर्फ उन पर मरते हैं,
नफरत है तो क्या हुआ यारो,
कुछ तो है जो वो सिर्फ हमसे करते हैं।”
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हमारे चले जाने के बाद, ये समुंदर भी पूछेगा तुमसे,
कहा चला गया वो शख्स जो तन्हाई मे आ कर,
बस तुम्हारा ही नाम लिखा करता था…
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ना हम रहे दील लगाने के क़ाबील,
ना दील रहा गम उठाने के क़ाबिल,
लगा उसकी यादों से जो ज़ख़्म दिल पर,
ना छोड़ा उस ने मुस्कुराने के क़ाबील.
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जाते वक़त उसने बड़े गुरुर से कहा था -
तुझ जेसे लाखो मिलेगे.
मैंने मुस्कराकर पूछा : मुझ जेसे कि तलाश ही क्यों ?
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टूटे हुए गिलास में जाम नहीं आता,
इश्क के मरीजों को आराम नहीं आता,
दिल तोड़ने से पहले सोचा तो होता,
टुटा हुआ दिल किसी के काम नहीं आता ….
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हमें ए दिल कहीं ले चल … बड़ा तेरा करम होगा
हमारे दम से है हर गम …न होंगे हम और ना गम होगा
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बुलबुल बैठा पेड पर मैने सोचा तोता है।
यारा तेरे प्यार मे दिल ये मेरा रोता है।
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कभी ये लगता है अब ख़त्म हो गया सब कुछ
कभी ये लगता है अब तक तो कुछ हुआ भी नहीं
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कुछ लोग मेरी शायरी से सीते हैं अपने जख्म,
कुछ लोगों को मैं चुभता हूँ सुई की नोक के जैसे ।
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एहसान नहीं है जिन्दगी तेरा मुझ पर ,
मैंने हर सांस की यहाँ कीमत दी है।।
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अपनो को दूर होते देखा ,
सपनो को चूर होते देखा !
अरे लोग कहते हैँ की फूल कभी रोते नही ,
हमने फूलोँ को भी तन्हाइयोँ मे रोते देखा !
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सिर्फ एहसास होता है चाहत मे, इकरार नहीं होता.
दिल से दिल मिलते हैं मोह्हबत में इंकार नहीं होता.
ये कब समझोगे मेरे दोस्तों, दिल को लफजों की जरूरत नहीं होती.
ख़ामोशी सबकुछ कह देती है प्यार में इज़हार नहीं होता
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तेरी आरज़ू मेरा ख्वाब है…
जिसका रास्ता बहुत खराब है…
मेरे ज़ख़्म का अंदाज़ा ना लगा…
दिल का हर पन्ना दर्द की किताब है…
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काटो के बदले फूल क्या दोगे…
आँसू के बदले खुशी क्या दोगे…
हम चाहते है आप से उमर भर की दोस्ती…
हमारे इस शायरी का जवाब क्या दोगे?
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